
बांगरदा(खरगोन) ब्रम्हाण्ड के समस्त प्राणियों में मनुष्य योनी सबसे श्रेष्ठ है। पिछले अनेक जन्मों के दुष्कर्मों को भोगने और उन्हें काटने का अवसर मिलता है, जिसे कि प्रारब्ध कहा जाता है। मनुष्य जैसे कर्म करता है वैसी ही परिस्थितियां सामने आती हैं और उसी अनुरूप परिणाम मिलते हैं। इसी को भाग्य, कर्मों का फल और किस्मत के नाम से जाना जाता है। युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के अनुसार प्रत्येक मनुष्य अपने भाग्य का निर्माण और भाग्य का लेखक स्वयं है।
उपरोक्त ऋषि चिंतन समीपस्थ देवग्राम मलगांव में अखिल विश्व गायत्री परिवार युगतीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय प्रज्ञा पुराण कथा, नौ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ एवं संस्कार महोत्सव के अवसर पर द्वितीय दिवस विदुषी बहन प्रज्ञा पाराशर ने उपस्थित श्रोताओं के मध्य दिया। उन्होंने कहा हमारे द्वारा पिछलें जन्मों में जो भी दुष्कर्म किये गये हैं और वर्तमान में वे प्रारबध बनकर हमारे सामने होते हैं, ऐसे दुष्कमों को मनुष्य योनि में भोगा जा सकता है। यह सुविधा ब्रम्हाण्ड के अन्य किसी प्राणी को नहीं मिलती।
सत्कर्म और अध्यात्म के माध्यम से पुरुष पुरुषोत्तम बन सकता है। व्यक्ति धन और बल प्राप्त कर बड़ा आदमी बन सकता है किन्तु महापुरुष बनने के लिये आत्मबल का होने और पुरुषार्थ करना आवश्यक है।
आत्मबल की प्राप्ति अध्यात्म से जुड़कर मिलती है। वर्तमान समय में मनुष्य इतना स्वार्थी बनता जा रहा है कि अपने माता-पिता की सेवा भी नहीं कर पा रहा है।
पांच दिवसीय महोत्सव की शुरुआत गुरुवार के दिन मंगल कलश यात्रा के माध्यम से हुई थी। कलश यात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुये बहन प्रज्ञा पाराशर के बताया कि भगवान की कथा में समस्त देव शक्तियों का आव्हान किया जाता है एवं ग्राम के समस्त नागरिकों को आमंत्रित किया जाता है ताकि भगवान का संदेश जन-जन तक पहुंच सके और धरती पर कोई भी व्यक्ति पीड़ित न हो। कलश यात्रा के माध्यम से ग्राम और क्षेत्र की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा की स्थापना होती है। जिसके माध्यम से सभी की सोच एवं विचारधारा श्रेष्ठ बनती है।
द्वितीय दिवस शुक्रवार के दिन प्रातःकालीन पारी में नौ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ सम्पन्न हुआ। जिसमें आसपास के परिजनों एवं ग्रामीणजनों ने सपत्निक गायत्री महायज्ञ में आहुतियां समर्पित करते हुये क्षेत्र की खुशहाली और प्रगति की ईश्वर से प्रार्थन की।
:- रामेश्वर फूलकर पत्रकार बांगरदा







